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Janmashtami @ saoner
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आत्म प्रकाश भाईजी भट्टी
सावनेर में आत्म प्रकाश भाई जी की 3 दिन की भट्टी का शुभारंभ 25 अप्रैल शनिवार को हुआ
सावनेर सेवा केंद्र पर नजदीक के सभी गांव गांव से भाई-बहन इस भट्टी में जुड़े
उनकी आत्मिक उन्नति के लिए सेवा केंद्र संचालिका आदरणीय सुरेखा दीदी ने ये भट्टी आयोजित की
भट्टी मे भाईजी ने इससे होने वाले लाभ वर्णन किया उन्होंने कहा
“भट्टी” नाम क्यों?
जैसे सोना आग में तपकर शुद्ध होता है,
वैसे ही भट्टी में व्यक्ति अपने:
- पुराने संस्कार
- नकारात्मक विचार
को बदलकर खुद को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करता है।
भट्टी में क्या किया जाता है?
- नियमित ध्यान (Meditation)
- मुरली सुनना (ज्ञान की क्लास)
- मौन (Silence) का अभ्यास
- आत्म-चिंतन और स्व-परिवर्तन
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सम्मान
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को 100 साल पूरे होने के उपलक्ष मे उनके मण्डल ने एक भव्य रैली का नियोजन किया है जिसमे अलग अलग गाव से भजन मण्डल आए हुए थे
उसी रैली मे ब्रह्माकुमारिज सावनेर सेवाकेन्द्र की भी कलश यात्रा का सहभाग था तद पश्चात इस भव्य रैली का समापन सावनेर के प्रसंग हाल मे हूवा जहा सावनेर सेवाकेन्द्र की संचालिका आदरणीय सुरेखा दीदी का Rashtriya Swayamsevak Sangh (आरएसएस) द्वारा सम्मान किया गया।
यह कार्यक्रम सावनेर के प्रसंग सेलिब्रेशन हॉल में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उनके समाजसेवा, समर्पण और सेवा कार्यों को सम्मानित करते हुए उन्हें भारत माता की मूर्ति, सम्मान चिन्ह एवं सर्टिफिकेट देकर नवाजा गया।
अपने संबोधन में सुरेखा दीदी ने कहा कि संगठन में बहुत बड़ी शक्ति होती है। उन्होंने बताया कि आरएसएस का अर्थ ही संगठन है, जो समाज को जोड़कर राष्ट्र निर्माण
की दिशा में कार्य करता है।
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
नारी केवल एक शरीर नहीं, बल्कि वह शक्ति, शांति, प्रेम और करुणा का साकार रूप है। एक नारी ही परिवार, समाज और विश्व में संस्कारों का बीज बोती है।
ब्रह्माकुमारी सुरेखा दीदी ने समझाया की जब नारी अपनी आत्मिक शक्ति को पहचानती है, तब वह केवल अपने जीवन को ही नहीं बल्कि पूरे समाज को बदलने की शक्ति रखती है। नारी केवल एक शरीर नहीं, बल्कि वह शक्ति, शांति, प्रेम और करुणा का साकार रूप है। एक नारी ही परिवार, समाज और विश्व में संस्कारों का बीज बोती है।आज आवश्यकता है कि हर महिला अपने अंदर की आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति को जागृत करे। जब नारी अपने वास्तविक स्वरूप — शांति, प्रेम और शक्ति की आत्मा — को पहचान लेती है, तब वह हर परिस्थिति में दृढ़ रह सकती है।
आइए इस महिला दिवस पर हम संकल्प लें कि हम अपने जीवन में सकारात्मक सोच, आध्यात्मिकता और श्रेष्ठ संस्कारों को अपनाकर समाज को एक सुंदर दिशा देंगे।
याद रखें —
“सशक्त नारी ही सशक्त समाज और सशक्त विश्व का निर्माण करती है।”
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